
देवास
कहा जाता है कि पुलिस के हाथ बहुत लम्बे होते हैं। इस कहावत को देवास पुलिस ने चरितार्थ कर दिखाया है। जनवरी में हुई दो लूट की वारदातों के आरोपितों को पुलिस ने देश के पूर्वी तट उड़ीसा और पश्चिमी तट गुजरात से पकड़ा है। आरोपितों से लूट का पूरा माल भी बरामद किया गया और वाहनों को भी जब्त किया गया है।
जनवरी महीने में शहर की सर्द शामें यूं तो सामान्य थीं लेकिन 8 जनवरी की शाम राधागंज क्षेत्र में एक वारदात ने माहौल गर्मा दिया। यहां एक बुजुर्ग महिला अपने पोते को स्कूल से लेकर घर जा रही थीं, तभी दो बाइक सवारों ने उनकी चेन लूट ली और पलक झपकते ही ओझल हो गए।
घटना के कुछ ही दिन बाद 19 जनवरी को मंदिर जा रहीं उषा नवरंगे भी इसी अंदाज में लुटेरों का शिकार बन गईं। कुछ ही दिनों के अंतर में एक ही तरीके से हुई दो घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया।
पहली घटना राधागंज निवासी रुकमणी शर्मा के साथ और दूसरी घटना उषा नवरंगे के साथ हुई थी। दोनों बुजुर्ग महिलाओं को बीएनपी थाना क्षेत्र के राधागंज में मोटरसाइकिल सवार बदमाशों का शिकार बनी।
बदमाशों ने उनके गले से सोने की चेन झपट ली और भाग निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न मान लिया।
उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि चेन लूटने करने वाले आरोपितों को हर हाल में गिरफ्तार किया जाए और महिलाओं में भरोसा लौटाया जाए। एसपी ने स्वयं मानिटरिंग शुरू की, रोजाना प्रगति की समीक्षा की और तकनीकी तथा फील्ड दोनों स्तर पर समंवय बढ़ाया।
एएसपी जयवीरसिंह भदौरिया और डीएसपी संजय शर्मा के मार्गदर्शन में चार टीमें गठित की गईं। शहर में जनसहयोग से लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू हुआ।
करीब 800 से अधिक कैमरों की रिकार्डिंग देखी गई। दिन-रात एक कर पुलिसकर्मी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहे। मोटरसाइकिल का रूट, संदिग्धों की चाल, कपड़े, भागने का पैटर्न— हर छोटी से छोटी बात को जोड़ा गया। आखिरकार कैमरों की तीसरी आंख ने उन चेहरों की पहचान कर ली जो हर वारदात के बाद गायब हो जाते थे।
तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को मध्यप्रदेश की सीमाओं से बाहर का रास्ता दिखाया। सुराग गुजरात और उड़ीसा तक जा पहुंचे। एसपी गेहलोद ने खुद उड़ीसा के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर स्थानीय सहयोग सुनिश्चित किया। पुलिस की टीमें सादे कपड़ों में 1300 किलोमीटर दूर गंजम जिला पहुंचीं।
कई दिन तक हुलिया बदलकर, कभी होटल तो कभी ढाबों में रुकते हुए निगरानी की गई। आखिरकार आरोपित कान्हू चरण बधई निवासी ग्राम झिटीकाबाड़ी जिला गंजम को पकड़ा गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का दूसरा सदस्य गुजरात के सूरत में छिपा है।
देवास पुलिस की टीम ने सूरत में भी कई दिनों तक डेरा डाला। स्थानीय गलियों की खाक छानी गई। अंततः वहां से धवल कुमार पारेख और उसकी पत्नी रेखाबाई को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि पत्नी को गिरोह की हर गतिविधि की जानकारी थी और चोरी का माल ठिकाने लगाने में उसकी अहम भूमिका रहती थी।
देश के कई राज्यों में घूमे आरोपी
गिरफ्तार आरोपितों ने देवास और रतलाम सहित कई क्षेत्रों में वारदातें करना स्वीकार किया है। जांच में पता चला कि यह अंतरराज्यीय गिरोह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना में 50 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। कई बार पकड़े जाने और जमानत पर छूटने के बाद भी उन्होंने अपराध का रास्ता नहीं छोड़ा। देवास पुलिस ने न केवल देवास में हुई वारदातों को ट्रेस किया, बल्कि रतलाम की वारदात का खुलासा भी किया और लूटी गई सोने की चेन और पेंडेंट सहित कुल 6 लाख 45 हजार रुपये का माल बरामद कर लिया।



