भोपालमध्य प्रदेश

महिलाओं के नाम बढ़ीं संपत्तियां, 1 अप्रैल से अब तक 10 हजार महिलाओं के नाम हुई रजिस्ट्रियां

भोपाल 

मौजूदा वित्तवर्ष में हुई रजिस्ट्री में आधी आबादी की संपत्ति की हिस्सेदारी 65 फीसदी तक हो गई है। हर साल 7 फीसदी की दर से ये बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, कुल संपत्तियों में महिलाओं का हिस्सा 19 फीसदी ही है। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में पंजीयन को लेकर सामने आ रही रोजाना की रिपोर्ट से ये स्थिति सामने आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं को रजिस्ट्री में दो फीसदी तक मिलने वाली छूट को बताया जा रहा है।

संपत्ति के क्रय विक्रय को लेकर हो रहे पंजीयन में रोजाना महिलाओं के नाम जिले में औसतन 75 नए पंजीयन किए जा रहे हैं। ये क्रय विक्रय के औसत पंजीयन का 65 फीसदी है।

बीते साल महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति हुई
भोपाल की शहरी संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ोतरी कर रही है। बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो प्रदेश भर में महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदी गई थी। इसमें भोपाल में 5900 करोड़ रुपए की संपत्ति महिलाओं के नाम पर दर्ज हुई थी। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में ये दो फीसदी ज्यादा था। जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदकर छूट का लाभ नियम से 128 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी बचाई जा सकी थी।

पंद्रह दिन में महिलाओं के नाम 9000 संपत्तियां
इस संबंध में जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा का कहना है कि, पंजीयन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, हर पंद्रह दिन में प्रदेश भर में महिलाओं के नाम पर 9400 संपत्तियां रजिस्टर्ड हो रही है। जबकि पुरुषों के नाम 7700 संपत्तियां दर्ज हो रही हैं। जाहिर है कि, महिलाओं के नाम 626 संपत्तियां रोजाना रजिस्टर्ड हो रही है। शासन के तय नियमों के अनुसार, संपदा 2.0 से पंजीयन की प्रक्रिया की जा रही है। अब पोर्टल पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है।

हर तरह की प्रॉपर्टी की डिमांड ज्यादा
खास बात ये है कि, मौजूदा समय में जिलेभर में फ्लैट, प्लॉट, डुप्लेक्स, फार्म हाउस और कृषि भूमि हर श्रेणी की प्रॉपर्टी की खरीदारी हो रही है। खासकर शहर के विस्तार वाले इलाकों में निवेशकों की रुचि सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रजिस्ट्री कार्यालय के अफसरों का कहना है कि, ज्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि, उनका ये भी कहना कि, भारतीय कल्चर के के चलते यहां आम दिनों के मुकाबले त्योहारी सीजन में लोग प्रॉपर्टी की खरीदी ज्यादा करते हैं।

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