इंदौरमध्य प्रदेश

स्थानांतरण के खेल में मचा भूचाल, इस खेल का कौन है जिम्मेदार ?

स्थानांतरण के खेल में मचा भूचाल, इस खेल का कौन है जिम्मेदार ?

 
बड़वानी 

जन चर्चा का विषय बना हुआ है कि इंदौर संभागीय उपायुक्त द्वारा बड़वानी जिले में नियम विरुद्ध और बैकडेट में जारी किए गए 9 छात्रावास अधीक्षकों समेत अन्य कर्मचारियों के स्थानांतरण  आदेश निरस्त कर दिए ?संभागीय उपायुक्त की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। लेकिन आदेश निरस्त होने के बावजूद मामले में 
राजनीतिक दबाव, का सिलसिला जारी 

 जहां जहां एक और इन दोनों स्थानांतरण को लेकर चल रही गर्म गर्मी से भ्रष्टाचार और रिश्वत के लेन-देन का जिन्न बाहर निकल आया है।डामोर की रवानगी और 9 आदेशों की खुली पोल,तबादले विवादों के घेरे में आ गए हैं।  प्रशासनिक हलचलों से यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि तबादले के बाद भी किसके इशारे पर ऐसे विवादित आदेश चलते रहे? 

एक ही तबादले की परतें खुलने के बाद बैकडेट में जारी 9 आदेशों की पोल खुलकर सामने आ गई है

​मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक तरफ जहाँ संभागीय उपायुक्त नियम विरुद्ध हुए इन आदेशों को निरस्त कर रहे हैंआदेशों को ही लागू करवाने औरसंबंधितों को प्रभार दिलाने का जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा है ! जन चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्थानांतरण नीति को दरकिनार कर अधीक्षकों से 'आर्थिक लाभ' का गणित सेट किया गया था, जिसके चलते निरस्त आदेशों के बाद भी प्रभार दिलाने की खींचतान जारी ह!

​ यह भी चर्चा निकाल कर सामने आ रही है कि विभागीय मिलीभगत और 'लेन-देन' का बड़ा सवाल,
​इस पूरे बैकडेट खेल मचा बवाल से देखना यह होगा कि आप इस पर क्या होगा

 
​लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और यह सवाल  खड़ा हो गया है कि
​"जिन छात्रावास अधीक्षकों और शिक्षकों ने स्थानांतरण लोगों की जुबान पर यह सुनने को मिल रहा है कि पसंदीदा पोस्टिंग के लिए कथित तौर पर भारी-भरकम राशि दी थी, अब उस लेनदेन का क्या होगा?"

क्या इस पर होगी जांच
बड़ा सवाल जिला प्रशासन टेकेगा घुटने या होगी निष्पक्ष जांच?

​क्या बैकडेट वाले स्थानांतरण मामले में दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी?
​या फिर जिला प्रशासन राजनीतिक दबाव के आगे घुटने टेककर निरस्त आदेश वालों को ही चुपचाप प्रभार सौंप देगा?
​यह देखना दिलचस्प होगा कि संभागीय उपायुक्त की सख्त कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को बेनकाब करता है या राजनीतिक रसूख के आगे पूरी कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।

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