
नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में जाने वालीं सांसद सायोनी घोष समेत 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ी अर्जी पर जवाब देने के लिए लोकसभा सचिवालय ने एक बार फिर नरमी दिखाई है। लोकसभा सचिवालय ने इन सांसदों को जवाब दाखिल करने की समय-सीमा 15 दिन के लिए आगे बढ़ा दी है। लोकसभा सचिवालय ने अब TMC के बागी सांसदों से 8 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। उन्हें दी गई समय सीमा 22 सितंबर को खत्म हो गई थी। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से और एक महीने की मोहलत मांगी थी लेकिन स्पीकर ने 15 दिन का समय दिया है।
इससे पहले 26 अगस्त को लोकसभा सचिवालय ने इन बागी सांसदों को पहले जवाब देने के लिए सात दिन की मोहलत मिली थी फिर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 22 सितंबर तक की मोहलत बढ़ा दी थी। अब एक बार फिर से इन बागी सांसदों को मोहलत मिली है। बता दें कि ममता गुट वाली TMC के अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई करने की मांग लोकसभा अध्यक्ष से की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी।
SC ने भी दो दिन पहले दिए थे निर्देश
दो दिन पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष से इन सांसदों के मामले पर तुरंत फैसला लेने को कहा था। शीर्ष अदालत ने बुधवार को उम्मीद जताई थी कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने वाले तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्य करार देने की मांग वाली याचिका पर ''जल्द'' निर्णय लेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उन्हें पता है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश नहीं दे सकते, ''लेकिन हम महज उन्हें मामले के शीघ्र समाधान के लिए स्मरण कराना चाहते हैं।''
लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है
यह याचिका पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने दायर की थी। सुनवाई शुरू होने पर, तृणमूल नेता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि बागी सांसदों को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उन्होंने अपना जवाब दाखिल नहीं किया है तथा और समय मांगा है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि अध्यक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। मेहता ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष को पता है कि उन्हें क्या करना है। वह मामले की गंभीरता को समझते हैं।''
20 में से 17 हो सकते हैं भाजपा में शामिल
अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में बागी सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेने में हुई कथित देरी को चुनौती दी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से संविधान के दल-बदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने का निर्देश देने का न्यायालय से अनुरोध किया था। इस बीच, 20 सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।



