
भोपाल
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में 'जुड़े आवास, वन्य-जीवन का विकास' थीम पर राज्य स्तरीय वन्य-जीव सप्ताह 2026 के प्रथम दिन का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ उपस्थित अधिकारियों द्वारा चित्रकारी कर सांकेतिक रूप से किया गया। वन्य-जीव सप्ताह के अवसर पर प्रथम दिन आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में लगभग 1200 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही 'एक फोटो, एक कहानी" प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों से वन्य-जीव एवं प्रकृति से संबंधित अपने 52 फोटो एवं उनसे सम्बंधित कहानियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई। आगंतुकों द्वारा संकल्प लेने के लिये वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पांच स्थलों पर संरक्षण दीवार (Conservation Wall) लगाई गई है। उक्त संरक्षण दीवार (Conservation Wall) पर बच्चों एवं समस्त आयु वर्ग के आगंतुकों तथा अधिकारियों द्वारा संकल्प लिया जाकर हस्ताक्षर किये गये।
वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार ने शुरू की वन्य-जीव पासपोर्ट-मेरा 1% वन्यजीवों के लिए अभिनव पहल
इस वर्ष वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं प्राणी उद्यान, भोपाल द्वारा एक नई एवं अभिनव गतिविधि 'वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए प्रारंभ की गई है। इस पहल का उद्देश्य वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को केवल पारंपरिक प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए लोगों और वन्य-जीव संरक्षण के बीच एक अधिक गहरा, सार्थक एवं दीर्घकालिक जुड़ाव स्थापित करना है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग केवल वन्य-जीव सप्ताह के दौरान किसी गतिविधि में भाग लेकर ही न रुकें, बल्कि 'वन्य-जीव संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लें और पूरे वर्ष तथा संभव हो तो जीवनभर इसके लिए योगदान करते रहें। इस पहल की मूल अवधारणा यह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने समय, प्रयास अथवा दैनिक कार्यों का कम से कम 1 प्रतिशत वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए समर्पित कर सकता है। इस प्रकार संरक्षण को वर्ष में केवल एक सप्ताह तक सीमित गतिविधि न बनाकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनावा जा सके।
"वन्य-जीव पासपोर्ट" पहल के अंतर्गत वन विहार के दोनों प्रवेश द्वारों पर पंजीकरण कराने वाले आगंतुकों को 'डिजिटल वन्य-जीव पासपोर्ट प्रदान किया जा रहा है। इसके माध्यम से वे वन विहार के विभिन्न महत्वपूर्ण बाड़ों एवं स्थलों पर स्थापित 10 रोचक वन्य-जीव एवं संरक्षण आधारित चैलेंज स्टेशनों में भाग ले सकते हैं। प्रत्येक स्टेशन पर प्रतिभागियों को वन्य-जीवों से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देना होता है। प्रत्येक चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने पर उन्हें वन विहार के स्वयंसेवकों द्वारा एक 'स्टाम्प' प्रदान किया जाता है। इस गतिविधि को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रतिभागी वन विहार के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के साथ-साथ वन्य-जीवों, उनके आवास, जैव विविधता तथा संरक्षण के महत्व के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकें।
इस पहल में 'मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से आए 100 से अधिक उत्साही स्वयंसेवक भी वन विहार के साथ जुड़कर वन्य-जीव सप्ताह की गतिविधियों के आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। ये स्वयंसेवक विभिन्न चैलेंज स्टेशनों पर प्रतिभागियों की सहायता करने, उनका मार्गदर्शन करने, वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के संचालन तथा विभिन्न गतिविधियों से जुड़े संरक्षण संदेशों को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन स्वयंसेवकों की स्वैच्छिक भागीदारी वन्य-जीव संरक्षण के प्रति नागरिकों में बढ़ती रुचि एवं सहभागिता को दर्शाती है और वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को एक मजबूत 'सामुदायिक आयाम प्रदान करती है।
10 चैलेंज पूरे करने के बाद प्रतिभागियों को "मेरा 1% वन्य-जीवों के लिए संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस संकल्प के अंतर्गत वे वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए अपने स्तर पर कुछ सार्थक कार्य करने की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लेते हैं। इस पहल के माध्यम से वन विहार का उद्देश्य संरक्षण को केवल एक सप्ताह के आयोजन के रूप में न रखते हुए इसे 'पूरे वर्ष की आदत और जीवनभर की जिम्मेदारी में परिवर्तित करना है। प्रतिभागियों को अपने संरक्षण संबंधी कार्यों को सोशल मीडिया पर साझा करने तथा वन विहार के सोशल मीडिया हँडल@वनविहारऑफिशल के साथ सहयोग एवं टैग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे वन्य-जीव संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय रहने वाले लोगों का एक व्यापक समुदाय तैयार करने में सहायता मिलेगी।
वन्य-जीव पासपोर्ट के माध्यम से प्रतिभागियों को उनके प्रदर्शन एवं सहभागिता के आधार पर विभिन्न स्तरों पर पहचान भी प्रदान की जा रही है। जो प्रतिभागी सभी 10 चैलेंज के सही उत्तर देकर '10 स्टाम्प' प्राप्त करते हैं, उन्हें "वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। 8-9 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव चैंपियन, जबकि 5-7 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव एक्सप्लोरर" के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस प्रकार इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को वन्य-जीव सप्ताह समाप्त होने के बाद भी वन्य-जीव संरक्षण से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करना है। वन्य-जीव सप्ताह-2026 के 'पहले ही दिन इस पहल को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जब कुल 118 आगंतुकों ने वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से 'सु अनन्या बोरासी एवं चिराग नागपाल प्रथम 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' बने, जबकि ' हर्षित पटेल, सु खुशी अग्रवाल, मोहित मेवाड़े एवं हितेश प्रजापति' को 'वन्य-जीव चैंपियन के रूप में मान्यता दी गई।
वन्य-जीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूतों को एक वर्ष में वन विहार में 12 निःशुल्क प्रवेश, जबकि "वन्य-जीव चैंपियनों को 6 निःशुल्क प्रवेश प्रदान किए जाएंगे। ये वन्य-जीव संरक्षण राजदूत एवं चैंपियन वन विहार और व्यापक समाज के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेंगे तथा अपने 'परिवार, मित्रों एवं समाज के बीच वन्य-जीव संरक्षण का संदेश पहुंचाने और दूसरों को भी छोटे-छोटे लेकिन सार्थक संरक्षण कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
"वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए पहल वन विहार के उस प्रयास को दर्शाती है, जिसके माध्यम से वन्य-जीव सप्ताह को अधिक 'सहभागितापूर्ण, रोचक एवं क्रियाशील' बनाया जा रहा है। केवल व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं अथवा समारोहों तक संरक्षण जागरूकता को सीमित रखने के बजाय इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक आगंतुक को एक प्रतिभागी, एक संकल्पकर्ता और अंततः संरक्षण के संदेशवाहक के रूप में विकसित करना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से स्वयंसेवकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस संदेश को और मजबूत करती है कि वन्य-जीव संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर इसमें योगदान दे सकता है।
इस पहल का मूल संदेश सरल है- 'वन्य-जीव संरक्षण केवल वन्य-जीव सप्ताह के दौरान की जाने वाली गतिविधि नहीं है, बल्कि यह हम सभी की ऐसी जिम्मेदारी है, जिसे हम अपने छोटे-छोटे लेकिन सार्थक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक दिन आगे बढ़ा सकते हैं।
"मेरा 1% वन्यजीवों के लिए मेरा संकल्प, मेरा प्रयास, मेरा योगदान।"
वन्य-जीव सप्ताह के दौरान वन विभाग की विभिन्न शाखाओं एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा भी प्रदर्शनी लगाई गई। इनमें ईको टूरिज्म बोर्ड सामाजिक वानिकी, बांस मिशन, क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, विंध्य हर्बल / एमएफपी पार्क, जैव विविधता बोर्ड एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रमुख है।
वन्य-जीव सप्ताह का उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों में वन्य-जीवों, उनके प्राकृतिक आवास, जैव विविधता एवं वन्य-जीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति के साथ संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव) एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम मनोज कुमार अग्रवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) मती बिंदु शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) बसवराव अन्निगिरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं विस्तार) मती अर्चना शुक्ला एवं सेवानिवृत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं सदस्य सचिव म.प्र. जैव विविधता बोर्ड सुदीप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट) एम.एल. मीना, प्रबंध संचालक म.प्र. लघु वनोपज संघ मती कमलिका मोहंता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव) एल. कृष्णमूर्ति, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-2) अजय कुमार यादव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन) एच.एस. मोहंता, वन संरक्षक भोपाल वृत्त क्षितिज कुमार सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
02 अक्टूबर को होंगे विभिन्न कार्यक्रम
वन्य-जीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत 02 अक्टूबर को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रातः 7 से 9 बजे तक पक्षी अवलोकन। प्रातः 10 बजे से विद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए जन-जागरूकता हेतु सृजनात्मक कार्यशाला, जिसमें क्ले मॉडलिंग, पेचर क्रॉफ्ट एवं स्टोन पेंटिंग शामिल हैं। प्रातः 10 से दोपहर एक बजे तक 'मध्यप्रदेश के वन्य-जीव' विषय पर स्टोन पेंटिंग (खुला वर्ग), वुडन टाइल पेंटिंग (खुला वर्ग), कहानी प्रतियोगिता (कक्षा 9 से 12) एवं खजाने की खोज (खुला वर्ग) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।



