
नई दिल्ली
भारत में सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकी नेटवर्क में बदले शाहजाद भट्टी का एक वीडियो सामने आया है. इसमें भट्टी भारत के दावों को चुनौती देता नजर आ रहा है. उसका दावा है कि जिन लोगों को भारतीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है, वे उसके नेटवर्क के सदस्य नहीं हैं. भट्टी ने उन्हें कथित तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़ा बताया. इतना ही नहीं, उसने दावा किया कि उसके करीब 3 हजार लोग अब भी बाहर हैं. यह बयान ऐसे समय आया है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा था कि ISI समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया गया है. कार्रवाई कई राज्यों में हुई और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया।
भट्टी का यह वीडियो इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें सिर्फ गिरफ्तारी से इनकार नहीं किया गया. उसने भारतीय एजेंसियों से गिरफ्तार लोगों के चेहरे और बरामद हथियारों को सार्वजनिक करने की चुनौती भी दी है. उसका कहना है कि इन लोगों का उसके नेटवर्क से कोई संबंध नहीं है. साथ ही उसने CJP से जुड़े लोगों को कानूनी और आर्थिक मदद देने की पेशकश भी की है. हालांकि, उसके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह वीडियो एक और चुनौती की तरह है. कार्रवाई के बाद अब लड़ाई सिर्फ जमीन पर मौजूद नेटवर्क के खिलाफ नहीं है. सोशल मीडिया पर चलने वाली कथित भर्ती, प्रचार और संपर्क की पूरी व्यवस्था भी निशाने पर है।
भारत की कार्रवाई के बाद भट्टी का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में समन्वित कार्रवाई कर ISI समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई की. इस दौरान 250 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने और 200 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई. एजेंसियों ने हथियार, विस्फोटक और निगरानी से जुड़े सामान भी बरामद करने का दावा किया।
कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद भट्टी का वीडियो सामने आया. उसने गिरफ्तार लोगों को अपना आदमी मानने से इनकार कर दिया. उसके मुताबिक, पकड़े गए लोगों का संबंध CJP से है और उनमें कुछ लोग जंतर-मंतर के प्रदर्शनों से जुड़े थे. उसने भारत सरकार से गिरफ्तार लोगों और कथित बरामद हथियारों को सार्वजनिक करने की मांग की।
3000 आदमी अभी भी बाहर: भट्टी का दावा
वीडियो में भट्टी ने सबसे बड़ा दावा अपने नेटवर्क की ताकत को लेकर किया. उसने कहा कि कार्रवाई के बावजूद उसके करीब 3 हजार लोग अब भी बाहर हैं. यह दावा कितना सच है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. फिर भी इस तरह का बयान सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नेटवर्क की वास्तविक क्षमता और उसके बचे हुए संपर्कों को लेकर नए सवाल खड़े होते हैं. भट्टी ने CJP से जुड़े लोगों को कानूनी और आर्थिक सहायता देने की बात भी कही. यानी उसका संदेश सिर्फ भारतीय कार्रवाई को नकारने तक सीमित नहीं है. वह कथित समर्थकों और संभावित संपर्कों के बीच यह संदेश देने की कोशिश करता दिख रहा है कि नेटवर्क खत्म नहीं हुआ है।
जंतर-मंतर कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
भट्टी के बयान में जंतर-मंतर का जिक्र भी खास है. हाल के प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तान से जुड़े कथित मॉड्यूल के जरिए माहौल का फायदा उठाने की जांच पहले से चल रही है. पंजाब पुलिस ने भी पहले दावा किया था कि ISI समर्थित एक मॉड्यूल ने जंतर-मंतर पर हमले की योजना बनाई थी और कुछ आरोपी प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पहुंचे थे।
ऐसे में भट्टी का CJP और जंतर-मंतर से जुड़े लोगों का नाम लेना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, उसके दावे को तथ्य मानने से पहले स्वतंत्र जांच जरूरी है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में जिन लोगों का जिक्र किया गया है, उनका भट्टी के नेटवर्क से वास्तविक संबंध क्या था।
सोशल मीडिया बना नेटवर्क का बड़ा हथियार
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर सोशल मीडिया के जरिए भर्ती, कट्टरपंथी प्रचार और संपर्क स्थापित करने के आरोप लगते रहे हैं. जांच एजेंसियों ने पहले भी दावा किया है कि कुछ भारतीय युवाओं से ऑनलाइन संपर्क किया गया. कथित तौर पर प्रचार गतिविधियों के लिए छोटी रकम और हिंसक कामों के लिए ज्यादा पैसे देने का लालच भी दिया गया।
यही वजह है कि गिरफ्तारी के बाद भट्टी का सार्वजनिक वीडियो सामने आना महज बयानबाजी नहीं माना जा रहा. सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना ऐसे नेटवर्क के लिए अहम हो सकता है. अगर कोई संगठन अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाता रहे कि उसके लोग सुरक्षित हैं और नेटवर्क सक्रिय है, तो उसके लिए नई भर्ती और संपर्क बनाए रखना आसान हो सकता है।
भट्टी की ‘गीदड़ भभकी’ का असली मकसद क्या?
भट्टी का दावा सही है या नहीं, यह जांच का विषय है. लेकिन उसके वीडियो की टाइमिंग पर ध्यान देना जरूरी है. बड़े स्तर पर कार्रवाई के तुरंत बाद ऐसा बयान देना कथित नेटवर्क की छवि बचाने की कोशिश हो सकता है. गिरफ्तारी के बाद चुप्पी उसके समर्थकों और संभावित नए सदस्यों के बीच कमजोरी का संदेश दे सकती थी. इसके उलट ‘मेरे 3 हजार लोग अभी बाकी हैं’ जैसी बात करके वह अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करता नजर आता है. साथ ही गिरफ्तारियों को CJP से जोड़ना भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने की रणनीति भी हो सकती है।
अब एजेंसियों के सामने असली चुनौती
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है. अगर भट्टी के नेटवर्क पर लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो उसके डिजिटल संपर्कों और कथित भर्ती तंत्र को तोड़ना भी जरूरी होगा. सोशल मीडिया अकाउंट, फंडिंग चैनल, संपर्क सूत्र और प्रचार नेटवर्क की निगरानी इस लड़ाई का अहम हिस्सा बन सकती है. भट्टी के ताजा वीडियो ने यह जरूर दिखाया है कि कार्रवाई के बाद भी सूचना और प्रभाव की लड़ाई जारी है. भारत के लिए अगला कदम यही तय करेगा कि गिरफ्तारियों के साथ नेटवर्क की जड़ें कितनी कमजोर हुई हैं और क्या उसके बचे हुए कथित संपर्कों को भी निष्क्रिय किया जा सकता है।



