
ढाका.
बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि देश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 20 अगस्त को कराया जाएगा। नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 13 अगस्त तय की गई है। यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के बाद हो रहा है।
निर्वाचन आयोग सचिवालय के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने गुरुवार को बताया कि मतदान 20 अगस्त को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक जातीय संसद (राष्ट्रीय संसद) के सत्र कक्ष में होगा। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति का चुनाव संसद के सदस्य करते हैं, जबकि चुनाव आयोग पूरी प्रक्रिया का संचालन करता है। अगर कोई सर्वसम्मत उम्मीदवार सामने आता है तो मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।
चुनाव का पूरा कार्यक्रम
अहमद ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन पत्र 13 अगस्त को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय में जमा किए जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) 16 अगस्त को पूर्वाह्न 10:00 बजे से शुरू होगी। उम्मीदवार 18 अगस्त को अपराह्न 4:00 बजे तक अपना नामांकन पत्र वापस ले सकते हैं। न्यूज एजेंसी बीएसएस के अनुसार, अख्तर अहमद ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद से विस्तृत बातचीत के बाद की गई है। हाफिज उद्दीन अहमद संविधान के प्रावधानों के तहत 90 दिनों के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहे हैं। संविधान के अनुसार इस 90 दिन की समय-सीमा के अंदर ही नए राष्ट्रपति का चुनाव पूरा होना जरूरी है। अहमद ने आगे कहा कि चुनाव के लिए मतदाता सूची पहले ही तैयार कर ली गई है और चुनाव से पहले बाकी सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।
24 जुलाई को मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया था इस्तीफा
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। वे अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए शपथ ले चुके थे। उनका कार्यकाल पूरा होने में अभी लगभग दो साल बाकी थे। 76 वर्षीय शहाबुद्दीन ने इस्तीफे का कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बताया। बता दें कि शहाबुद्दीन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे हैं। वे 1971 के मुक्ति युद्ध के वयोवृद्ध और निचली न्यायपालिका के पूर्व न्यायाधीश थे। पिछली संसद ने उन्हें राष्ट्रपति चुना था। जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक सड़क विरोध प्रदर्शनों के काफी समय बाद भी वे अपने संवैधानिक पद पर बने रहे थे। इन प्रदर्शनों ने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था। हसीना 5 अगस्त 2024 को भारत भाग गईं और तब से वहीं रह रही हैं। इस्तीफे के समय कुछ अटकलें भी लगाई गई थीं कि प्रधानमंत्री रहमान की सरकार नाममात्र के राष्ट्रपति पद से खुश नहीं थी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि शहाबुद्दीन ने हसीना से फोन पर संपर्क किया था, जिससे सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के शीर्ष नेतृत्व में नाराजगी हुई। हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ने इन रिपोर्टों को 'बेबुनियाद' करार दिया था।
क्या है सदन की स्थिति
प्रधानमंत्री रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के पास 350 सदस्यों वाले सदन में दो-तिहाई बहुमत है। पार्टी ने अभी तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि कार्यक्रम की घोषणा संसद अध्यक्ष से परामर्श के बाद ही की गई है और पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में पूरी की जाएगी।



