
शिवपुरी
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने बयानों के चलते आए दिन सुर्खियों में बने रहते हैं. इस बार वह मध्य प्रदेश के शिवपुरी की करेरा क्षेत्र के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर 'बगीचा सरकार' क्षेत्र में मौजूद राम राजा गार्डन में अपनी राम कथा कह रहे हैं. कथा के तीसरे दिन उन्होंने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए समाजसेवियों और आधुनिक दिखावे की संस्कृति पर एक तीखा तंज कसा, जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का समाजसेवियों पर तंज कसने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से सर्कुलेट हो रहा है, जिसमें बाबा ने तो यहां तक कह दिया है कि समाजसेवियों से उपहार में एक केला लेने से तो बेहतर है अस्पताल में भर्ती मरीज मर ही जाए।
मरीज का मर जाना बेहतर, ऐसा क्यों बोले बागेश्वर बाबा?
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने समाजसेवियों के काम करने के तरीकों पर चुटकी लेते हुए कहा, '' आज के समय में सेवा कम और प्रदर्शन ज्यादा हो रहा है. अस्पताल में किसी जरूरतमंद मरीज को केवल एक केला बांटने के लिए छह-छह समाजसेवी और 40-40 फोटो खींचने वाले कैमरामैन पहुंच जाते हैं.'' उन्होंने हंसते-हंसते यहां तक कह डाला कि इस तरह के दिखावे से अच्छा तो मरीज को मर ही जाना चाहिए।
आपके प्रचार-प्रसार से जरूरतमंद आहत न हो
उनके इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद से ही इसपर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. हालांकि, अपने बयान के अगले ही क्रम में उन्होंने समाज सेवा की मूल भावना को भी स्पष्ट किया. पंडित शास्त्री ने समाजसेवियों को नसीहत देते हुए कहा, '' समाज सेवा का अपना एक दायरा और गरिमा होती है. हर सेवा करने वाले को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उनके प्रचार-प्रसार या सेवा के तौर-तरीकों से किसी गरीब या जरूरतमंद का मन आहत न हो।
इससे पहले बाबा संविधान और रामायण को एक कहकर देश के राजनीतिक गलियारे में नई बहस छेड़ चुके हैं. वहीं, कथा के दूसरे दिन वह सोशल मीडिया पर उल्टी सीधी पोस्ट करने वालों को कलयुग का राक्षस तक बता चुके हैं. अब कथा के तीसरे दिन उन्होंने समाजसेवियों पर टिप्पणी कर एक और बहस को जन्म दे दिया है।



