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कांगो में इबोला का कहर, 2,000 से ज्यादा संक्रमित; 754 मौतों ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

 नई दिल्ली

अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इबोला के 2,011 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 754 लोगों की मौत हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप बन गया है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 753 मरीज अभी भी अस्पतालों या आइसोलेशन केंद्रों में भर्ती हैं, जबकि 366 लोग इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं. हालांकि संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम अभी भी चुनौती बना हुआ है और फिलहाल केवल 67 फीसदी संपर्कों की ही पहचान हो पाई है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 15 मई से शुरू हुआ यह प्रकोप इतनी तेजी से फैल रहा है कि स्वास्थ्य अधिकारी इसकी रफ्तार को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कम से कम 80 फीसदी नए मामले अज्ञात ट्रांसमिशन चेन से सामने आ रहे हैं, यानी यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि इन मरीजों को संक्रमण कहां से मिला। 

स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक इस प्रकोप के पहले संक्रमित व्यक्ति यानी 'पेशेंट जीरो' की पहचान नहीं हो सकी है. वहीं, सशस्त्र संघर्ष के कारण लोगों का विस्थापन और खनन क्षेत्रों में लगातार आवाजाही भी संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में बाधा बन रही है। 

WHO के स्वास्थ्य आपातकाल प्रमुख डॉ. चीक्वे इहेक्वेआज़ू ने बताया कि हाल में सामने आई कई मौतें ऐसे लोगों की हैं, जिनकी समुदाय में ही मौत हो गई और वे इलाज के लिए किसी स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं पहुंच सके. इस बीच, इटुरी प्रांत के कई इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन नहीं मिलने के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है. कई कर्मचारियों का कहना है कि प्रकोप शुरू होने के बाद से उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया गया है। 

स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि बुंडीबुग्यो इबोला वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि इटुरी प्रांत में दो संभावित दवाओं के परीक्षण के लिए मरीजों का पंजीकरण शुरू कर दिया गया है, जिससे भविष्य में इलाज का रास्ता खुलने की उम्मीद है। 

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