
नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर जारी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में जानकारी दी कि भारत ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG और कच्चा तेल (Crude Oil) के आयात स्रोतों में भारी विविधता लाते हुए सप्लायर्स के नेटवर्क को कई गुना बड़ा कर दिया है, ताकि अब देश में किसी तरह की गैस और तेल की किल्लत पैदा न हो।
संसद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अब भारत किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या समुद्री रास्ते की अनिश्चितता पर निर्भर नहीं रहेगा. आपको बता दें कि पिछले दिनों ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज बंद होने से देश में तेल और गैस की किल्लत पैदा हो गई थी. इसी के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।
पहले और अब की स्थिति
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है. ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी रुकावट से निपटने के लिए वैश्विक बाजार में नेटवर्क को व्यापक बनाया गया है. पहले जहां सरकार 6 देशों से एलएनजी का आयात कर रही थी. वहीं, अब इसे बढ़ाकर 15 कर दी है. इसके अलावा, कच्चा तेल पहले 27 देशों से आयात किए जा रहे थे, जिसे अब बढ़ाकर 41 कर दिया गया है. यानी अब 41 देशों से कच्चे तेल का आयात किया जा रहा है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता बनने में मदद मिल सकती है।
आपूर्ति में विविधता से क्या होंगे बड़े फायदे?
इससे यह फायदा होगा कि किसी एक देश, युद्ध क्षेत्र या विशेष समुद्री मार्ग जैसे रेड सी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट आने पर भी भारत की गैस और तेल आपूर्ति अब बाधित नहीं होगी. इसके अलावा, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलती हैं, तो अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीद करने पर प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है. सरकार के इस कदम से घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, क्योंकि सीएनजी, पीएनजी और रसोई गैस के साथ-साथ पावर और फर्टिलाइजर प्लांट्स के लिए गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी।
आपात स्थिति के लिए देश का बैकअप प्लान
आयात के स्रोतों में डायवर्सिफिकेशन के साथ-साथ सरकार देश के भीतर कच्चे तेल के आपातकालीन भंडारण को भी तेजी से बढ़ा रही है. इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय इलाकों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले तीन रणनीतिक तेल भंडार स्थापित किए हैं. इसके अलावा, ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में कुल 6.5 MMT की अतिरिक्त वाणिज्यिक सह रणनीतिक रिजर्व सुविधाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. साथ ही ओएनजीसी कर्नाटक में 1.75 MMT क्षमता की एक अलग भंडारण सुविधा विकसित कर रही है, जिसका आधा हिस्सा रणनीतिक भंडार के रूप में आरक्षित रहेगा।



