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बिहार को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा, 3591 करोड़ से फोरलेन होगा मुजफ्फरपुर-सोनबरसा हाईवे

पटना
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने  रेल मंत्रालय की लगभग 9,450 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में खड़गपुर – भद्रक (रानीताल) तक 173 KM लंबी चौथी लाइन बिछाने, भद्रक – हरिदासपुरके बीच 75 किमी (ओडिशा) चौथी लाइन बिछाने, गुम्मिडिपुंडी – गुडुर 90 किमी लंबी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) तीसरी और चौथी लाइन बिछाने और कटक – पारादीप (बडाबन्धा) के बीच 72 किमी लंबी (ओडिशा) तीसरी और चौथी लाइन बिछाने को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट में बिहार को भी बड़ा तोहफा दिया है।

केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार में NH-22 के मुज़फ़्फ़रपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन में बदलने को मंज़ूरी दी है। इस पर 3591 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जो बाकी चार रेल परियोजनाओं की लागत से ज्यादा है। यानी बिहार की इस सड़क परियोजना को सबसे ज्यादा पैसे आवंटित किए गए हैं। सभी पांचों परियोजनाओं पर कुल 13,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

3590.73 करोड़ रुपये की लागत
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) पर कुल 3590.73 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा और इसकी कुल लंबाई 82.578 किलोमीटर होगी। यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट रणनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार के बढ़ते नेशनल हाईवे नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। यह सोनबरसा में भारत-नेपाल सीमा को NH-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) पर मुज़फ़्फ़रपुर जैसे आर्थिक केंद्रों से जोड़ने वाले एक मुख्य फीडर कॉरिडोर के तौर पर काम करता है।

कहां-कहां से गुजरेगी सड़क
बयान के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से मुज़फ़्फ़रपुर, मकसूदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुताही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भीड़-भाड़ काफी कम हो जाएगी। उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से यात्रियों और माल की आवाजाही तेज़ और सुरक्षित होगी, यात्रा की क्षमता बेहतर होगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मज़बूत होगी। इसे 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार और 80 किमी प्रति घंटे की औसत रफ़्तार के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें कोई 'एट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग' (सड़क के बीच में कट) नहीं होगी, जिससे तेज़ और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।

सांस्कृतिक और धार्मिक जगहों तक पहुंच आसान
PM गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के सिद्धांतों के अनुसार योजनाबद्ध यह प्रोजेक्ट औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों सहित मुख्य आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक कनेक्टिविटी में सुधार करके मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ावा देगा। जारी बयान के अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी से सामान और खेती से जुड़े सामान की सप्लाई चेन को आसानी से लाने-ले जाने में मदद मिलेगी, इलाके की आर्थिक तरक्की को बढ़ावा मिलेगा, और बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी में ऐतिहासिक जानकी पुनौरा धाम मंदिर जैसी अहम सांस्कृतिक और धार्मिक जगहों तक पहुंच आसान होगी।

मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा हिस्सा रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम
NH-22 का मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा हिस्सा रणनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत अहम है, क्योंकि यह नेशनल फ्रेट ग्रिड से आसानी से जुड़ता है। यह NH-31 और NH-122 जैसे मौजूदा कॉरिडोर के साथ मिलकर काम करता है और बरौनी जैसे इंडस्ट्रियल ज़ोन और गंगा के किनारे बने लॉजिस्टिक्स हब तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है। यह पास के भीठा-मोड़ लैंड पोर्ट के ज़रिए सीमा पार यात्रियों और सामान की आवाजाही को भी आसान बनाता है।

इस प्रोजेक्ट में सात बड़े पुल
इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट में सात बड़े पुल (जिसमें साल भर बहने वाली बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा एक बड़ा पुल शामिल है), तीन रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और दो फ्लाईओवर (1170 मीटर और 270 मीटर) बनाने का प्रावधान है, ताकि ट्रैफिक की आवाजाही बनी रहे और सुरक्षित, तेज़ रफ़्तार यात्रा सुनिश्चित हो सके। बयान में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट से यात्रा की औसत रफ़्तार बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन की बचत और गाड़ी चलाने के खर्च में सुधार होगा, जिससे इलाके में लोगों और सामान की आवाजाही और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक आसान कनेक्टिविटी
यह प्रोजेक्ट पूरे बिहार में अहम आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक आसान कनेक्टिविटी देता है। साथ ही, अपग्रेड किया गया कॉरिडोर पांच PM गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (चार इंडस्ट्रियल एस्टेट और एक मेगा फ़ूड पार्क), चार सामाजिक केंद्रों (बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनौरा धाम, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी आकांक्षी ज़िले) और दो लॉजिस्टिक्स केंद्रों (मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन) तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, जिससे पूरे इलाके में सामान और यात्रियों की तेज़ी से आवाजाही हो सकेगी।

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