
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के सेनापति मंगल देव को साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त और ऊर्जा का कारक माना गया है. जब भी मंगल अपनी राशि परिवर्तित करते हैं, तो मानव जीवन और प्रकृति पर इसका गहरा और सीधा असर पड़ता है. 18 सितंबर 2026 को मंगल देव अपनी मित्र राशि सिंह से निकलकर अपनी नीच राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करने जा रहे हैं.
कर्क राशि जल तत्व की राशि है और मंगल अग्नि तत्व का ग्रह हैं. अग्नि और जल के इस मेल के साथ-साथ मंगल के अपनी नीच राशि में होने के कारण उनकी शुभता में भारी कमी आ जाती है. मंगल देव 18 सितंबर से 12 नवंबर 2026 तक (लगभग 55 दिनों तक) इसी नीच अवस्था में विराजमान रहेंगे.
नीच के मंगल का यह गोचर व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, अनावश्यक गुस्सा, दुर्घटना, आर्थिक नुकसान और रिश्तों में खटास ला सकता है. मुख्य रूप से 4 राशियों को इन 55 दिनों के दौरान विशेष सतर्कता और सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी:
मेष राशि (Aries)
प्रभाव: मंगल आपकी ही राशि के स्वामी हैं और आपके चौथे (सुख, माता व संपत्ति) भाव में नीच होकर गोचर करेंगे.
बढ़ेगी चुनौती: पारिवारिक जीवन में अशांति और माता जी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है. प्रॉपर्टी या मकान से जुड़े लेन-देन में जल्दबाजी न करें, धोखा हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तीखी बहस हो सकती है. अपने गुस्से पर काबू रखें, वरना बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं.
मिथुन राशि (Gemini)
प्रभाव: आपकी राशि से मंगल का गोचर दूसरे (धन व वाणी) भाव में होने जा रहा है.
बढ़ेगी चुनौती: आपकी कड़वी वाणी बने बनाए रिश्तों और काम को बिगाड़ सकती है. अचानक बड़े और अनावश्यक खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे आपका बजट गड़बड़ा सकता है. पैसों के लेन-देन या किसी को उधार देने से बचें. सेहत के मोर्चे पर मुख या दांतों से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है.
तुला राशि (Libra)
प्रभाव: मंगल देव आपकी राशि से दसवें (कर्म, करियर व पिता) भाव में नीच के होकर विराजमान रहेंगे.
बढ़ेगी चुनौती: कार्यक्षेत्र और नौकरी में परिस्थितियां आपके प्रतिकूल हो सकती हैं. उच्च अधिकारियों (Boss) के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. नौकरी बदलने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें. व्यापार से जुड़े लोगों को प्रतिद्वंदियों से कड़ी चुनौती मिलेगी और घाटा होने की आशंका रहेगी. पिता जी की सेहत का विशेष ध्यान रखें.
धनु राशि (Sagittarius)
प्रभाव: आपकी राशि से मंगल का यह गोचर आठवें (अष्टम – संकट, दुर्घटना व गुप्त शत्रु) भाव में होगा.
बढ़ेगी चुनौती: अष्टम भाव में नीच के मंगल का गोचर स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है. वाहन बहुत सावधानी से चलाएं, चोट-चपेट या दुर्घटना का खतरा बना रहेगा. कोर्ट-कचहरी या विवादों से दूर रहें. गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं. वित्तीय जोखिम वाले किसी भी काम में हाथ न डालें.
मंगल के अशुभ प्रभाव दूर करने के अचूक उपाय
– 18 सितंबर से 12 नवंबर तक प्रतिदिन या हर मंगलवार को कम से कम 3 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें.
– मंगलवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और लाल चंदन या लाल कनेर के फूल अर्पित करें.
– मंगलवार के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को गुड़, लाल वस्त्र या लाल मसूर की दाल का दान करें.
– इस दौरान अपने व्यवहार में नम्रता लाएं, बहसबाजी से बचें और सात्विक आहार ग्रहण करें.



